Friday, 6 November 2020

अमित शाह बंगाल के राजनीति को समझ नहीं पाए है, बंगाल की जनता किसी बाहरी चेहरा को अपना नेता नहीं मानते

बंगाल के चुनाव में अभी भी देरी है पर बंगाल अन्य राज्यों की तरह अभी भी कोरोना संक्रमण से जूझ रही है, ऐसे काल में गृहमंत्री अमित शाह के बंगाल के दो दिन के लिए चुनावी दौरा करना बंगाल के जनता के समझ के परे है।

https://m.hindustantimes.com/india-news/expert-on-gujarat-gymkhana-not-bengal-tmc-on-amit-shah-s-statue-flub/story-i7XCrLdZ2fQ2JA6180xiXO.html

अमित शाह का बंगाल दौरे में एक खास बात जो सामने आया है कि वो बंगाल को जात - पात के राजनीति में झोंकने का प्रयास कर रहे है। विचार का विषय यह है कि हिंदी बोले जाने वाले प्रदेशों की तरह बंगाल में जात पात की राजनीति में बंगाली समाज बिल्कुल विश्वास नहीं करते है और यही कारण जातीय संघर्ष आजतक बंगाल में देखने को नहीं मिला है।

अमित शाह शायद बंगाल के राजनीति को समझने की बडी भुल कर रहे है, बंगाल की राजनीति एक व्यक्ति विशेष के इर्द गिर्द घूमती है, पहले कांग्रेस के सिद्धार्थ शंकर रे, फिर सीपीएम के ज्योति बसु और आज सुश्री ममता बनर्जी जिन्होंने सीपीएम के 34 साल पुराने किला को गिराने का काम कर चुकी हैं।

भाजपा बंगाल में इतने सालों में एक भी प्रतिभाशाली व्यक्ति या नेता को तैयार नहीं कर सके जो बंगाल की शेरनी ममता बनर्जी को आगामी विधान सभा में चुनौती दे सके। बंगाल के लोग भाजपा के साइबेरियन बर्ड या दिल्ली से आयायत किए नेता के   चेहरे पर विश्वास नहीं करने वाले है।

Thursday, 5 November 2020

बिहार के चुनाव से लोगो का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने अर्नब गोस्वामी के अपराध के पीछे छुपना पड़ा

प्रधान मंत्री को छोड़कर सभी मोदी सरकार के मंत्री मंडल ने अमित शाह के अगुवाई में जिस प्रकार एक अपराधी अर्नब गोस्वामी के अपराधिक कृत के लिए लामबंद होते देखा गया यह किसी भी तरह से देश में एक स्वास्थ राजनीति का परिचायक नहीं हो सकता है।

समझने वाली बात यह है कि इस प्रकार का मंत्रिमंडल के द्वारा हल्ला बोल को एक राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में देखा जाना चाहिए और जिसे बिहार के चुनाव को ध्यान में रखकर खेला गया है।

भाजपा के हर राजनीतिक कृत में एक उद्देश्य छुपा रहता है जिसे खोज कर बाहर निकलना जरूरी होता है। जिस प्रकार से बिहार के चुनाव में एनडीए किरकिरी और तेजस्वी यादव के हर राजनीतिक रैलियों में अपार भीड़ देखने को मिल रहा था उससे भाजपा और नीतीश कुमार के घोर निराशा पैदा कर चुका है।

इस प्रकार के भाजपा और नीतीश कुमार के विफलताओं से बिहार के जनता के ध्यान को भटकाने के लिए अर्नब गोस्वामी के मुद्दे को भाजपा ने हथियार के रूप में लिया गया ताकि चुनाव पर चर्चा ना होकर गोस्वामी पर चर्चा केंद्रित हो सके।

बिहार के आखरी दौर के चुनाव में पीएम मोदी और नीतीश कुमार ने नए-नए टोटके आजमाने की कोशिश किया जैसे पीएम के द्वारा बिहार के लोगो को पत्र लिखना और नीतीश कुमार द्वारा अपने जीवन के आखिरी चुनाव की घोषणा को टोटके के रूप में देखा जाना चाहिए।

Wednesday, 4 November 2020

अर्नब गोस्वामी को महाराष्ट्र के तत्कालीन भाजपा सरकार ने क्यों बचाव किया था

अर्नब गोस्वामी द्वारा आत्महत्या के लिए उसकाने वाले मामले की घटना कोई पिछले वर्ष की बात नहीं है बल्कि यह घटना 2018 में घटित हुई थी।

मीडिया सूत्रों की माने तो अर्नब गोस्वामी ने अपने रिपब्लिक टीवी के आंतरिक सज्जा के लिए एक महिला को कार्यभार सौंपा था और उक्त काम के लिए अपने रकम खर्च कर दिया था पर उस काम के भुगतान के लिए मामले को लेकर अर्नब गोस्वामी उस पौढ़ महिला को टालते रहे और भुगतान की रकम लगभग 5 करोड़ रुपए जानबूझ कर बकाया किया गया।

रुपए के तंगी के लिए थक हार कर उक्त महिला और उनके बेटे ने अपने बकायादारों से बचने के लिए मा और बेटे ने आत्महत्या   करने पर मजबूर हुए।

जिस समय की यह घटना है उस समय भाजपा की सरकार महाराष्ट्र में थी और भाजपा के दखल के कारण पूरे मामले को लीपापोती करके मामले को दबा दिया गया था जब कि आत्महत्या नोट में अर्नब को दोषी ठहराया था।

अर्नब के गिरफ्तारी पर गुस्सा करना अमित शाह से लेकर सभी मंत्रियों का जायज़ दिख रहा है क्यों की अर्नब को बचाने के लिए भाजपा सरकार ने अहम भूमिका निभाया था और अब दोबारा जांच में भाजपा नंगे हो सकते है।

क्यों बीजेपी कभी बलात्कारियों और कभी अपराधियों के साथ खड़े होते है

जो गधे अर्नब गोस्वामी का समर्थन कर रहे है उसने ही अन्वय नायक और उसकी माँ को दो साल तक पेमेंट नही दिया।

जबकि इस कमीने का ऑफिस का इंटीरियर डिजाइन में उसने बहुत रुपया बर्बाद कर दिया था इसलिए उनको आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा,सुसाइड नोट पर अर्नब का नाम भी है।

2018 में महाराष्ट्र्र में बीजेपी की सरकार थी इसलिए केस क्लोज कर दिया गया और अर्नब को दलाली का इनाम मिल गया,लेकिन शिवसेना ने केस के फिर से खोल दिया,पुराने केस को दोबारा जांच का अधिकार कानून ने राज्य पुलिस को दिया हुआ है। आज अन्वय नायक की बीवी को कुछ हद तक न्याय की उम्मीद जगी होगी।

गौर करने वाली बात यह है कि जब सुशांत सिंह ने आत्महत्या किया था तब कोई सुसाइड नोट सुशांत ने नहीं लिखा था पर राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा ने उनके मौत को हत्या का संज्ञा देकर सीबीआई जांच के लिए बिहार सरकार ने आदेश किया था और अनव्य नायक के मामले में सुसाइड नोट में अरनब का नाम था ।

Saturday, 31 October 2020

पुलवामा को लेकर पीएम मोदी राख में आग लगाने की कोशिश कर रहे है।

पाकिस्तान के साथ मैच फिक्सिंग के जरिए बिहार के चुनाव के दौरान इस मामले को लेकर हल्ला मचाने से भाजपा को कोई फायदा बिहार के चुनाव में होता नहीं दिख रहा है।

देश को सुरक्षित हाथों में कहने वाले भाजपा मैच फिक्सिंग बयान के जरिए खुद अपने को एक्सपोज कर चुके है। मोदी सरकार आज तक यह नहीं कह सके कि पुलवामा में 300 kg. आरडीएक्स किस रास्ते से पुलवामा तक पहुंचा था और इतने भारी मात्रा में आरडीएक्स को पहुंचाने के लिए किस सरकारी अमला ने आतंकवादियों को मदद किया था।

मोदी सरकार आज तक इस बात का खुलासा नहीं कर पाएं है पुलवामा के आतंकवादी हमले का आईबी रिपोर्ट होने के बावजूद इतनी बड़ी घटना को किसके इशारे पर नजरंदाज किया गया।

साल भर बीतने के बाद भी आजतक मोदी सरकार किसी भी एक आतंकवादी को क्यों सजा नहीं दिला सके, जब कि जिन लोगो को इस मामले में गिरफ्तारी किया गया था वो सभी जमानत पर छूट चुके है और समय बीतने के साथ साथ सभी आरोपी बेदाग छूट जाएंगे।

Friday, 30 October 2020

बिहार के चुनाव में भाजपा के तोते उड़ने लगे है तो पीएम मोदी जिंदा तोते को अपने हाथ में लिए बैठे है

बिहार में दो सत्र के चुनाव अभी बाकी है पर एक बात साफ हो चुकी है जदयू और भाजपा के पास कोई ठोस मुद्दे ना होने के कारण दोनों पार्टियां आरजेडी के मुखिया तेजस्वी यादव के आगे बौने दिख रहे है।

https://www.jansatta.com/national/bjp-nda-pm-narendra-modi-trolled-by-social-media-users-on-his-nature-love-with-parrots-in-kevadiya-jungle-safari/1558492/

जिस प्रकार से तेजस्वी यादव के रैलियों में भीड़ उमड़ रहा है उससे तो भाजपा के ट्रंप कार्ड पीएम मोदी के तोते उड़ते हुए दिख रहा है और यही कारण भाजपा के मुखिया तोते को हाथ में लिए बैठे है।

बिहार के चुनाव में लोगो को दिखाने के एनडीए मैदान में पर लोजपा के चिराग पासवान को अलग थलग करके भाजपा एनडीए का विभाजन कर दिया है। इस चुनाव में भाजपा दोहरी राजनीति खेलने में लगे हुए है।

भाजपा अपने राजनीतिक ड्रामेबाजी के जरिए नीतीश कुमार के वोट बैंक में ही सेंदमारी करने में लगे हुए है तभी चिराग पासवान को जदयू के उम्मीदवारों के खिलाफ उतारे है।

भाजपा की रणनीति यह है किसी भी तरह से नीतीश कुमार से सीएम पद को छीना जाए और यह तभी संभव है जब जदयू का     आंकड़ा भाजपा से कम रहे और इसी कारण भाजपा अपने वोट शेयर को चिराग पासवान के खाते में ट्रांसफर करने में लगे है।

Thursday, 29 October 2020

पुलवामा को लेकर बिहार चुनाव के समय पाकिस्तान के मंत्री के द्वारा बयानबाजी भाजपा की सोची समझी रणनीति है

जब बिहार का चुनाव भाजपा और जदयू के हाथ से जाते दिख रहा है तब भाजपा पुलवामा के घटना को दोबारा याद दिलाने के लिए पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री फवाद चौधरी से पाकिस्तान के सदन में यह कहलाया है पुलवामा की घटना को पाकिस्तान सरकार ने कराया है।

पुलवामा के घटना को घटित हुए कई साल हो चुके है, क्या कारण है बिहार के चुनाव के समय ही पाकिस्तान के मंत्री को इस प्रकार के खुलासा करना पड़ा ताकि बिहार के जनता का ध्यान भाजपा बेरोजगारी से पाकिस्तान पर केन्द्रित किया जा सके।

विश्व के सबसे धनी पार्टी भाजपा जब अरबों रुपए बिहार के चुनाव में बहा सकते है, जब भाजपा सत्ता बदलने के खेल में एमएलए के खरीद फरोख्त में अरबों रुपए के बोली लगा सकते है तब पाकिस्तान में बैठे किसी मंत्री को इस प्रकार के बयान बाजी के लिए कितने करोड़ रुपए भेजना कौन सी बड़ी बात है।