भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने टीएमसी के बागी सांसदों को ED और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का डर और भारी भरकम रकम खर्च करके बागी सांसदों को टीएमसी को अलग तो करवा दिया है पर अपने पार्टी में विलय नहीं होने दिया।
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आखिर भाजपा ने इन सांसदों को यतीम क्यों छोड़ दिया उसके पीछे की वजह संघ है जो यह नहीं चाह रहे थे टीएमसी में कई मुस्लिम संसद है अगर सभी को बीजेपी में ज्वाइनिंग करवाते है तो मुस्लिम सांसद बीजेपी के सदस्य हो जाएंगे तब भाजपा का हिंदू मुस्लिम एजेंडा नहीं चल पाएगा।
अमित शाह अपनी खोजी राजनीति के चलते एक विलुप्त राजनीतिक पार्टी NCPI को खोज कर बागी सांसदों को उक्त पार्टी में विलय किए जाने ढिंढोस पीटा।
जब कि NCPI ने इन बागियों को अपने पार्टी में लेने से इनकार किया है और जब तक बीजेपी पचास से सौ करोड़ रुपए NCPI के सुपुर्द नहीं करते है तब तक बागी संसद यतीम घूमते रहेंगे क्यों कि NCPI इतनी कंगाल पार्टी है जिनके ऊपर ED का कोई प्रभाव नहीं होगा।