Thursday, 17 March 2022

2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर द कश्मीर फाइल्स की पटकथा लिखा गया है ताकि धार्मिक उन्माद को जन्म दे सके

आज देश के सामने असली समस्या *द कश्मीर फाइल्स* नहीं है। यह बात एक प्रत्यक्षदर्शी इतिहासकार *अशोक पांडण्य तथा सी.म. भूपिया जी* ने स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है, कि यह फिल्म किसलिए बनवाई गई है।

https://youtu.be/rFC8_S_USjM 
फिल्म कश्मीर फाइल्स की असलियत पर इतिहासकार अशोक पांडेय

इसका उद्देश्य लोगों में धार्मिक उन्माद फैलाना, और लोगों को जाति-धर्म के विवाद में इस तरह उलझा देना है कि वे विकास, शिक्षा, गरीबी, बेरोजगारी, असमानता, अपराध, बलात्कार, जैसे मुद्दों को भूल जाएं, और धार्मिक उन्माद में डूब जाए। जिससे E.V.M. घोटाले और चुनाव आयोग पर उठ रहे सवाल भी अपने आप दब जाए। 

यह कोई एक दिन में नहीं हुआ है। इसके पीछे पहले से एक long term Strategy काम कर रही है, कि फिल्म की पटकथा क्या होगी, सीन में क्या दिखाया जाएगा, फिल्म कब बनकर तैयार होगी, और कब रीलिज होगी, मीडिया और पेड़-ब्रोकर्स कैसे इसे प्रमोट करेंगे।

सब कुछ एक preset strategy के तहत हो रहा है लोग हमें असली मुद्दों से भटका कर धार्मिक उन्माद में उलझा रहे हैं, हमरा ध्यान भटका रहे हैं, और हमसब  उसमें बुरी तरह उलझते चले जा रहे हैं, लगातार असली मुद्दों से भटक कर *द कश्मीर फाइल्स* पर ही अटके हुए हैं। 

अगर हमसब को असली मुद्दों पर ध्यानाकर्षण करना है तो आज पावन पर्व होली के इस शुभ अवसर पर इसका शुभारम्भ कर देना चाहिए।

Tuesday, 15 February 2022

गृह राज्य मंत्री के बेटे की जमानत को लेकर योगी सरकार ने रिव्यू पिटीशन या बृहद पीठ में या सुप्रीम कोर्ट में क्यों चुनौती नही दिया

इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रवीण अधिवक्ता श्री विजय चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जिस प्रकार से योगी सरकार के एजी के टीम ने पैरवी किया है उससे यह जाहिर हो रहा है उच्चतम न्यायालय के द्वारा गठित एसआईटी ने जो चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किए है उसको प्रदेश के अटॉर्नी जनरल ने अपने पैरवी में कोई महत्व नहीं दिया है और कमजोर दलील दिए जाने के कारण आशीष मिश्रा को जमानत मिल पाया है।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश शासन अगर चाहते तो बेल पिटीशन पर दिए गए आदेश के खिलाफ स्टे या रिव्यू पिटीशन डाल सकते थे पर योगी सरकार ने जानबूझ कर नही किया।

हाई कोर्ट के अधिवक्ता श्री विजय चंद्र श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि अगर प्रदेश शासन CAA के तथाकथित उपद्रवियों के जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते है तो किसानों को गाड़ी से रौंदने वाले आशीष मिश्रा के जमानत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पिटीशन क्यों नही दाखिल किया।

Friday, 19 November 2021

किसानों के बदहाली को खत्म करने के लिए पीएम मोदी को दोबारा नए Farmer Reform BILL लाने की अवश्यकता है

ध्यान देने वाली बात यह है पीएम मोदी अपने लच्छेदार बातों के द्वारा देश की जनता को उल्लू बनाना चाहते है, जब तीन कृषि बिल को कैबिनेट की बैठक बुलाकर अध्यादेश जारी किया और सदन में बिना चर्चा किए कानून बना दिया तब आज बिना कैबिनेट की बैठक बुलाए कैसे तीन काले कृषि कानून की वापसी टीवी में आकर घोषणा कैसे कर सकते है ?

किसानों के साथ 11 बैठक में पीएम मोदी ने कभी हिस्सा नहीं लिया और किसनों की पीड़ा को समझना नही चाहा पर टीवी में आकर कानून वापसी का क्रेडिट लेने आ गए।

एक अहम बात है कि तीन कृषि कानून को टीवी में आकर समाप्त करने की घोषणा तो कर दिया है पर नए Farmer Reform Bill पर पीएम मोदी चुप्पी साध लिया।

आनन फानन में कृषि कानून को टीवी में आकर वापस लेने में यह भी साबित हो रहा है कि पीएम मोदी की नजर में संसद की कोई गरिमा नही है, जब की इस कानून की वापसी में उनके राजनीतिक कारण सामने आ चुका है।

Tuesday, 16 November 2021

योगी आदित्यनाथ की दबंगई का बदला पीएम मोदी ने उन्हें सड़क पर बिना सुरक्षा के पैदल चलवाया

उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले मोदी_शाह बनाम योगी आदित्यनाथ के झगड़े अब सड़क में भी दिखने लगा है। देश के प्रधान मंत्री पिछले दिन पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के लिए  पहुंचे थे। हवाई जहाज से उतरने के बाद पीएम मोदी अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ अपने वाहन में प्रवेश कर लिया।

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दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ को नीचा दिखाते हुए उन्हे अपने गाड़ी में चढ़ने नही दिया बल्कि बिना सुरक्षा के बाबा को सड़क पर पैदल चलने पर मजबूर किया और पीएम मोदी से भिड़ने के लिए योगी की उनकी औकात दिखा दिया।

इन झगड़ों के पीछे की वजह यह रही अमित शाह योगी आदित्य नाथ के पंख को कतरने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते थे पर योगी के दबंगई के आगे पीएम मोदी और अमित शाह की एक आगे एक भी नही चला।

Monday, 1 November 2021

मोदी सरकार से लेकर बीजेपी और उनके भक्त क्यों फरेबी और धोखेबाज समीर को बचाने में लगे ?

मूल मुद्दा है कि समीर दाऊद वानखेडे किस धर्म से जुड़े हुए है अगर वो निकाह किया है तो वो तो मुस्लिम ही होगा ना कि हिंदू और निकाह करने वाली बात समीर के अब्बा ने काबुल कर चूके है।

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हिंदुओं और मुसलमानों को उनके नाम से पहचाने जाते है, हिंदुओं में यास्मीन नाम किसी लड़की के लिए कब रखा जाता है। बीजेपी इधर उधर का वीडियो बनाकर मूल मुद्दे को भटकाने और समीर वानखेडे जैसे फर्जी और फरेबी व्यक्ति को बचाने की एक नाकामयाब कोशिश में लगे है।

समीर वानखेडे एनसीबी में रहते हुए किससे जान का खतरा है और कब और किसने उन्हे जान से मारने की धमकी दिया है जो गृह मंत्री अमित शाह ने समीर को जेड प्लस सुरक्षा देंने का काम किया है। 

असल में समीर वानखेडे जो धन उगाही करते रहे उसका एक बडा हिस्सा बीजेपी को पहुंचाते रहे अगर समीर को एनसीबी से हटाना पड़ा तो मुंबई बीजेपी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

अब सवाल यह भी है समीर वानखेडे और उनके परिवार का फालूदा सरेआम नवाब मलिक निकाल रहा है फिर भी उनके परिवार के लोग मानहानि मुकदमा दर्ज करनें से क्यों बच रहे है ?

Wednesday, 13 October 2021

प्रयागराज के जिलाधिकारी के खिलाफ मूर्ति विसर्जन के मामले को लेकर उच्च न्यायालय में होगी अवमानना याचिका दाखिल

प्रयागराज के जिला प्रशासन ने मूर्ति विसर्जन को लेकर भले ही उच्च न्यायालय के उस आदेश पर हावी हो गए है जिसमे माननीय उच्च न्यायालय ने मूर्ति विसर्जन को  न्यायालय ने 2015 के स्थाई आदेश के आधार पर कृत्रिम तलाव में मूर्ति विसर्जन की बात कह चुके है।

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यह दूरभाग्यपूर्ण विषय है की एक जिलाधिकारी हाई कोर्ट के आदेश को कूड़ेदान में फेंकने का साहस दिखा रहा है जिससे पता चल रहा है प्रदेश शासन का उच्च न्यायालय के आदेश का कोई सम्मान नहीं है।

चिंता का विषय यह भी है कि प्रयागराज के जिला प्रशासन ने नवमी के दिन भी मूर्ति विसर्जन स्थल का खुलासा अपने प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नही किया है।

बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव डाo पी के राय ने प्रेस को अवगत कराया है कि संस्था के अधिवक्ता श्री विजय चंद्र श्रीवास्तव और सुनीता शर्मा ने प्रयागराज जिलाधिकारी के खिलाफ एक अवमानना याचिका तैयार कर चुके है जिसे पी.के.राय और समाजसेवी योगेंद्र कुमार पांडे की तरफ से आगामी सोमवार को दाखिल किया जायेगा।

Sunday, 10 October 2021

अगर प्रयागराज प्रशासन ने हाई कोर्ट के विसर्जन के आदेशों का उलंघन किया तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश चंद्रचूड़ के संज्ञान में लाया जाएगा

गौरतलब है कि हाल में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज के जिलाधिकारी को मूर्ति विसर्जन के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डाo डी वाई चंद्रचूड़ ने  2014 और 2015 के आदेश में कृत्रिम तलाव बनाकर मूर्ति विसर्जन का आदेश पारित किया था और कृत्रिम तलाव में 2014 से 2018 तक लगभग पांच वर्षो तक विसर्जन चलता रहा।

समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और अधिवक्ता श्री विजय चंद्र श्रीवास्तव एवम सुनीता शर्मा ने कहा कि अगर जिला प्रशासन हटधर्मिता के कारण हाल में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों का जानबूझकर अनदेखा और अवहेलना करते तो पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग न्यायाधीश डाo डी वाई चंद्रचूड़ के संज्ञान में लाया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी वर्तमान जिलाधिकारी पर होगी।