Wednesday, 17 January 2018
Political Analysis of India: मन्द बुद्दि वाले मोदे जी ने हज सब्सिडी बन्द करके इ...
Political Analysis of India: मन्द बुद्दि वाले मोदे जी ने हज सब्सिडी बन्द करके इ...: देश का बडा दुर्भाग्य है कि देश के लोगो ने एक ऐसे प्रधान मन्त्री का चयन किया है जिसकी दूरदर्शिता मामले मे ज्ञIन शून्य है और दुसरी तरफ उनके...
मन्द बुद्दि वाले मोदे जी ने हज सब्सिडी बन्द करके इण्डियन ऐयर लाइंस के पैरो मे चला दी कुल्हाडी, जाने हज सब्सिडी का सच
देश का बडा दुर्भाग्य है कि देश के लोगो ने एक ऐसे प्रधान मन्त्री का चयन किया है जिसकी दूरदर्शिता मामले मे ज्ञIन शून्य है और दुसरी तरफ उनके भीतर मुस्लिम समाज के लोगो के प्रति क्रुरता और घ्रिणा कुट-कुट कर भरा हुआ और क्यों न हो, जिस आर.एस.एस से उन्होने ऐ.बी.सी.डी सिखा है, जिनकी मादरी जुवान मुस्लिम घ्रिणा ही है I
आगामी समय पर होने वाले कुछ राज्यो के विधानसभा के चुनाव को ध्यान मे रखकर प्रधान सेवक ने अपने को कट्टर हिन्दु साबित करने के चक्कर मे मुस्लिम समाज पर दिये जाने वाले हज सब्सिडी को तत्काल और सम्पूर्ण रुप से बन्द करने का फैसला ले चुके भी है और दुसरी तरफ अगले साल 2019 के जनवरी महिने मे इलाहाबाद होने वाले अर्ध कुम्भ मेले पर 2019 के लोकसभा के चुनाव को ध्यान मे रखकर लम्बे खर्च की तैयारी शुरु कर चुके है I
https://hindi.news18.com/news/delhi/what-is-the-truth-of-haj-subsidy-1236556.html
मजे की बात यह है कि हज सब्सिडी बंद करने के बावजूद 1.79 लाख मुस्लिम लोग हज करने से पिछे नही हटे है, यह खुलासा मोदी सरकार के मन्त्री मुक्तार अब्बास नकवी ने ही किया है I
वैसे देखा जाये तो प्रधान मन्त्री ने एक पत्थर से दो शिकार करने की कोशिश की है, एक तरफ हज सब्सिडी को बन्द करना और दुसरी तरफ केन्द्र की ‘ऐयर इण्डिया’ का भट्टा बैठा कर इन्डियन ऐयर लाइंस को कौडी के दाम पर अम्बानी या अडानी के हाथो मे बेचना I
समझने वाली बात यह है सरकार अभी तक हज पर सब्सिडी देती तो थी पर उनके उपर यह अंकुश भी बना था कि वे किसी भी विदेशी विमान से हज के लिये नही जा सकते है, अगर जाना है तो ऐयर इण्डिया के विमान से ही जाना पडेगा, उधर ऐयर इण्डिया हज के दौरान अपने टिकट के मूल्यो पर जबरद्स्त बडा-चढा कर वसूल किया करती रही I
सब्सिडी के खत्म हो जाने के बाद आने वाले समय मे विदेशी ऐयर लाइंस कम्पनियां भी पुर–जोर कोशिश करेगी कि अपने टिकटो मे कुछ छूट देकर सभी हज करने वाले को अपने पाले मे डाले, और दुसरी तरफ मोदी सरकार हज करने वाले को जबरियन ऐयर इण्डिया मे सफर नही करा सकती है, इन्ही बातो से पता चलता है कि मोदी जी की दुरदर्शिता मे भारी कमी को दर्शाति है I
Sunday, 14 January 2018
Political Analysis of India: जस्टिस लोया के मौत वाले मामले मे अमित शाह को बचाने...
Political Analysis of India: जस्टिस लोया के मौत वाले मामले मे अमित शाह को बचाने...: पिछले शुक्रवार को चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य न्याधीश को सरेआम उनके कार्यप्रणाली के खिलाफ जो भी बाते रखे थे वे अपने जगह सही रहा ...
जस्टिस लोया के मौत वाले मामले मे अमित शाह को बचाने के लिये भाजपा को गुण्डई पर उतरना पडा, जबरन करवाई पुत्र से प्रेस वार्ता
पिछले शुक्रवार को चार
जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य न्याधीश को सरेआम उनके कार्यप्रणाली के खिलाफ जो
भी बाते रखे थे वे अपने जगह सही रहा पर उक्त वार्ता मे जस्टिस लोया के मौत के बारे
मे चर्चा करना शायद अब गलत होता दिख रहा है I
जजों के द्वरा जस्टिस
लोया के बारे मे बात करने पर भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह अपने को शोहराब उद्दीन के एन्कॉन्टर
मामले मे फंसते दिखे, इसके अलावा उस याचिका से भी है जिसे तहसिन पूनेवाला ने उच्चतम न्यालय
जस्टिस लोया के मौत के बारे मे जांच बैठाने की मांग शिर्ष अदालत से की गई, जिसकी सुनवाई आज होने की सम्भावना है I
सुत्रो
के हवाले से खबर है कि जस्टिस लोया के मौत के कारणो की जांच वाले मामले ने अमित शाह
के अन्दर भीषण घबराहट और बेचैनी इतनी बढ गई कि वे भाजपा के साथ पुरे दम पर गुण्डई पर
ही उतर आये है और शायद महाराष्ट्र पुलिस के बल से जस्टिस लोया के लडके अनुज लोया पर
दबाव देकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन अमित शाह ने करवाया I
उक्त
प्रेस वार्ता मे लोया के पुत्र दबाव मे आकर अपने पिता के मौत के कारणो से पल्ला झाडने
की कोशिश की और साथ मे यह भी कहा कि वे नही चाहते है कि उनके पिता के मौत की जांच हो, जब की उनके मौत को संदिग्ध बताने मे जस्टिस
लोया के बहन ने ही उठाया था और तभी से यह मुद्दा मीडिया मे छाया रहा पर अमित शाह ने
जस्टिस लोया के बहन की शंका पर कोई गम्भीरता नही दिखाई पर अमित शाह की घबराहट चार
जजों के प्रेस वार्ता के बाद पैदा हुआ I
जस्टिस
लोया के पुत्र के प्रेस वार्ता के पश्चात ट्वीटर मे कल से ही घमासान छिडा हुआ है, भाजपा और गोदी मीडिया कडे विरोध का जवाब
देने मे असर्मथ दिखे पर यह तय है कि अमित शाह जस्टिस लोया के पुत्र के द्वरा प्रेस
मे दिये गये बयान को शिर्ष अदालत मे मोहरा बनाकर पेश करेगी, अब देखना यह है कि अदालत पुत्र का दबाव
मे आकर बयान को मानते है या वे अपने विवेक के आधार पर न्याय देते है I
Saturday, 13 January 2018
Political Analysis of India: चार जजो द्वरा प्रेष वार्ता कभी नही हुई तो कभी भी क...
Political Analysis of India: चार जजो द्वरा प्रेस वार्ता कभी नही हुई तो कभी भी क...: यह सत्य है कि पिछले 70 सालो मे कभी भी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक साथ हो कर कोई प्रेष वार्ता नही की , पर यह भी सत्य है कि पिछले 70 सालो म...
चार जजो द्वरा प्रेष वार्ता कभी नही हुई तो कभी भी किसी प्रधान मन्त्री ने उच्चतम न्यालय के कार्य प्रणाली मे दखल भी नही दिया
यह सत्य है कि पिछले
70 सालो मे कभी भी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक साथ हो कर कोई प्रेष वार्ता नही की, पर यह भी सत्य है कि पिछले 70 सालो मे देश के किसी
भी प्रधानमन्त्री ने उच्चतम न्यालय के कार्यप्रणाली मे या जजमेन्ट मे छुपे तौर पर interfere या प्रभावित करने की कोशिश नही की और ना ही किसी
प्रधान मन्त्री ने उच्च न्यालय या सी.बी.आई कोर्ट को मैनेज की होगी और ना ही किसी प्रधानमन्त्री
ने उच्चतम न्यालय से अपने गुर्गे नेता को गम्भीर मुकदमे से बचाने के लिये मुख्य न्याधीश
को रिटायरमेन्ट के बाद किसी प्रदेश का राज्यपाल बनाया होगा I
देश के न्यूज चैनेल्स
जिन्होने अपनी जमीर को मोदी सरकार के हाथों मे चन्द रुपयों के खातिर बेच चुके है ऐसे
किडे मकौडे वाले पत्रकार का कोई अधिकार नही बनता है कि स्टुडीयो मे बैठ कर उन चार
जजो के निर्णय पर उंगली उठाने का साहस दिखाये, सभी जानते है कि किस
के बल पर अर्नगल साहस दिखाने की हिम्मत दिखाई I
जजों द्वरा बुलाये गये
प्रेष वार्ता देश के लोकतन्त्र को बचने के लिये सही कदम माना जाना चाहिये, इन सुतीये पत्रकारो को यह भी नही पता है कि जब उच्चतम
न्यालय मे आरजक्ता फैली हो उसकी रोक थाम के लिये किस दरवाजे को खटखटाया जाये I
बहुत लोगो को पता ही
नही कि उच्चतम न्यालय मे फैले गन्दगी को साफ करने के लिये देश के राष्ट्रपति का संविधानिक
अधिकार ही नही है और ना ही राष्ट्रपति उच्चतम न्यालय के किसी भी कार्य मे दखल दे
सकते है, लिहाजा चार जजों द्वारा उठाये गये कदम को न्यालय
मे फैले अराजक्ता को समाप्त करने कि दिशा मे सही कदम था I
Friday, 12 January 2018
Political Analysis of India: अपने एक नेता को बचाने के लिये देश के लोकतन्त्र की ...
Political Analysis of India: अपने एक नेता को बचाने के लिये देश के लोकतन्त्र की ...: देश दुनिया मे रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ करती है पर पिछले दिन सुप्रीम कोर्ट के चार जजो ने जिस ढंग से एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कि...
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