Thursday, 18 July 2019

क्या भाजपा ने कर्नाटक के बागी विधायकों के लिये शीर्ष अदालत को ईवीएम की तरह हैक किया है

कर्नाटक के बागी विधायको ने जिस ढंग से अपने-अपने पार्टीयो से त्यागपत्र के मामले को लेकर विधानसभा के स्पिकर के खिलाफ अदालत पहुंचे थे और जिस प्रकार उच्चतम न्यालाय ने उनके याचिका को स्विकार किया उसी दिन देश के पढे लिखे लोगो को यह अहसास हो चुका था भाजपा कोर्ट को मैनेज करने मे सफल हो चुके है ।

जिस वरियता से शिर्ष अदालत ने बागी विधायको के याचिका को सुना उससे देश के लोगो को एहसास हो चुका था कि न्यालाय भाजपा के दबाव मे पुरी तरह से आ चुकी है और कोर्ट ने जो फैसला सुनया वो भी पूर्व कल्पित या आभासित थी ।

दूसरी तरफ यही शीर्ष अदालत आजतक राफेल स्कैम वाले मामले मे Revision Petition को लेकर मौन धारण किये हुए है जैसा मोदी Mob Lynching पर कोई ठोस कानून लाने मे मौन है । शायद कभी वो समय भी आयेगा जब लोग हतोउत्साहीत होकर सरकार के विरोध मे सुप्रीम कोर्ट मे याचिका डालने से कतरायेंगे

https://www.indiatoday.in/india/story/karnataka-floor-test-postponed-bjp-mlas-go-to-sleep-all-developments-1571065-2019-07-18

उच्चतम न्यालय के बागी विधायको पर दिये गये आदेश को उचित ढंग से समझा जाये तो यह देखने को मिला कि कोर्ट ने बागी विधयको के उपर No Confidence Motion के दौरान कोई भी Whip जारी करने पर रोक लगा दियें है और साथ मे अपने आदेश मे यह भी लिख चुके है कि पार्टी इन बागी विधायको No confidence Motion के दौरान सदन मे उपस्थित होने के लिये बाध्य नही कर सकते है ।

शीर्ष अदालत ने इस प्रकार के आदेश पारित करके भाजपा को Horse Trading के लिये दरवाजे खोलने का काम किया है, क्या अदालत यह समझ नही सके कि क्यो इतने विधायक अपने पार्टी छोड़ने मे अमादा थे, इस आदेश के जरीये उच्चतम न्यालय ने दल बदल कानून को नजर अन्दाज किया है जिस कारण द्ल-बदल कानून की महुत्व व गरिमा को कमजोर किया गया है ।































Thursday, 13 June 2019

Political Analysis of India: ईवीएम सरकार यूपी के लिये धृताराष्ट्र बने हुए है पर...

Political Analysis of India: ईवीएम सरकार यूपी के लिये धृताराष्ट्र बने हुए है पर...: मोदी मीडिया के सहारे बंगाल के सरकार को बदनाम करने के लिये एक बडी साजिश भाजपा शुरु कर चुकी है , एक माहौल तैयार किया जा रहा है कि बंगाल मे...

ईवीएम सरकार यूपी के लिये धृताराष्ट्र बने हुए है पर बंगाल के Law and Order पर घोर आपत्ती है


मोदी मीडिया के सहारे बंगाल के सरकार को बदनाम करने के लिये एक बडी साजिश भाजपा शुरु कर चुकी है, एक माहौल तैयार किया जा रहा है कि बंगाल मे कानून व्यवस्था पुरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और इस फार्जी मौहोल के बुनियाद पर बंगाल मे राष्ट्रपति शासन लगाने का षडयन्त्र ईवीएम सरकार की पुरे दम से शुरु हो चुकी है ।

https://www.facebook.com/DNHindi/videos/452091605354345/

अगर बंगाल मे ईवीएम सरकार द्वरा राष्ट्रपति शासन लगाने के पिछे Law and Order हे एक वजह देखते है तो ऐसी सोच प्रधान चौकीदार को उत्तर प्रदेश मे Law and Order मे भारी गिरावट के बाद क्यों नही दिख रही है जब कि उत्तर प्रदेश मे पिछले 15 दिनों मे 72 हत्यायें और 24 बलात्कार की घटना घट चुके है ।

उत्तर प्रदेश मे जिस ढंग से अपराध अपने चरम सिमा तक पहुंच चुकी है उसकी समीक्षा अखिलेश यादव ने बडे जोरदार तरिके से मीडिया के सामने रखा है उसका विरोध प्रदेश की सरकार नही कर पा रहे है, जिस बढते हुए अपराध पर प्रदेश शासन मौन है वहीं ईवीएम सरकार ( केन्द्र सरकार) धृताराष्ट्र की भूमिका उत्तर प्रदेश के लिये अपनाये हुए है ।

बंगाल मे राजनीतिक खूनी खेल बाम दलो के शासन काल से चली आ रही है, बंगाल के लिये ऐसे राजनीतिक संघर्ष कोई नई बात नही है पर हां समय समय पर पात्र बदल जाते है और इसी कारण बंगाल की आम जनता इन राजनीतिक संघर्ष मे मौन रहते है ।

अंग्रेजी मे एक कहावत है कि “Fishing in the trouble water” और भाजपा बंगाल मे ऐसे राजनीतिक संघर्ष की आड मे बंगाल मे राष्ट्रपति शासन लगाना चाहते है और राष्ट्रपति शासन के आड मे 20 लाख गुम हुए ईवीएम को विधानसभा चुनाव से पूर्व सेट करके शासन मे आना चाहते है ।






Tuesday, 11 June 2019

Political Analysis of India: चौकीदार की बातों पर यकीन करना भाजपा और भक्तो की मज...

Political Analysis of India: चौकीदार की बातों पर यकीन करना भाजपा और भक्तो की मज...: मोदी की एक पुरानी बिमारी है कि वो हमेशा ही खबरो मे छाये रहना चाहते है उनके प्रथम चरण के शासन का ल को देखें तो प्रक्लपो की बौछार लगा दिय...

चौकीदार की बातों पर यकीन करना भाजपा और भक्तो की मजबूरी हो सकती है पर आम जनता उनकी बातों का कोई तवज्जो नही देती


मोदी की एक पुरानी बिमारी है कि वो हमेशा ही खबरो मे छाये रहना चाहते है उनके प्रथम चरण के शासन का ल को देखें तो प्रक्लपो की बौछार लगा दिये थे, Stand up India से लेकर अनगिनत India को लेकर प्रक्लपो की फेरिसत लम्बी रही पर अगर आज आप किसी लम्बे वाली दूरबीन से खोजने जायेगे वे एक भी नही मिलेगे क्यों कि मामला तो मोदी के फेंकने तक सिमित है |


https://hindi.news18.com/news/nation/mukhtar-abbas-naqvi-announced-scholarships-to-5-crore-minority-students-in-the-next-5-years-2094220.html?fbclid=IwAR1F5uhUeunQrypZ8jGxlAumB3KRMxkGe9dNyovejUqlXlM9_v2tJuMySoE


मेरी बातो को अगर आप विष्वास नही करना चाहते है तो जरा इस बात का पता लगा ले कितने किसानो को जो धन राशी देने के वादा किया था आज तक कितने किसानो को वो रकम मिल चुकी है और साथ मे यह भी पता करे कि आज तक आयुस्मान भारत का लाभ कितने गरीब लोगो ने अब तक उठाया है ।


अगर निचे दिये खबर को ध्यान से पाढे तो अल्पसंख्यक समाज के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए अगले पांच सालों में पांच करोड़ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी. इतना ही नहीं इनमें आधी संख्या में लड़कियां होंगी. मोदी सरकार ने अल्पसख्यको के नाम पर सभी अन्य धर्मो के लोगो को रिझाने की कोशिश की गई है |


गौर से देखे तो मोदी सरकार ने इस खबर को लोक लोकभावन बनाने के लिये 5 करोड अल्प सख्यकों को High light दम-खम के साथ किया है और तमाम अनावश्यक बातो पर बल दिया है पर पुरी खबर मे इस बात पर चुप्पी साधे रहे कि इस योजना के तहत मोदी सरकार कितने करोड रुपयों का आवंटन करेंगे और दूसरी तरफ मोदी सारकार इस बात पर भी सन्नाटा खींच कर बैठ गये कि Scholarship के नाम पर एक-एक छात्र-छात्रओ को सालाना कितनी रकम देंगे ।


हमे इस बात को बिल्कुल नही भूलना चहिये कि पिछले बजट मे मोदी सरकार ने शिक्षा बजट को ना केवल घटाया था बल्कि शिक्षा गला घोंटकर रख चुके है जिस फलस्वरुप JNU मे M.Phil के सीटों को घटाया बल्कि शोध करने वाले छात्र-छात्रा के संख्या मे घोर कटौती की है ।



Monday, 10 June 2019

Political Analysis of India: मोदी सरकार भाजपा के गुण्डो के बल पर बंगाल मे आरजक्...

Political Analysis of India: मोदी सरकार भाजपा के गुण्डो के बल पर बंगाल मे आरजक्...: 2019 के लोकसभा चुनाव मे भले ही भाजपा को पश्चिम बंगाल मे बढत मिली हो पर इस बढत का श्रेय प्रदेश के बाम दलो को जाना चाहीये । यह बात साफ है क...

मोदी सरकार भाजपा के गुण्डो के बल पर बंगाल मे आरजक्ता और अशान्ती फैलाकर राष्ट्रपती शासन लगाने के फेर मे है

2019 के लोकसभा चुनाव मे भले ही भाजपा को पश्चिम बंगाल मे बढत मिली हो पर इस बढत का श्रेय प्रदेश के बाम दलो को जाना चाहीये । यह बात साफ है कि प्रदेश से 34 साल पुराना बाम दलों को उखाड फेकने मे ममता बनर्जी की अहम भूमिका रही है, सुत्रो की माने तो बामदल बदला लेने के लिये इस लोकसभा चुनाव मे गुप्त रुप से भाजपा के साथ समझौता के स्वरुप अपने वोट शेयर को भाजपा के झोली मे डलवाने मे सफल रहे ।

गौरतलब है कि 2014 लोकसभा के चुनाव मे बाम दलों का वोट शेयर लगभग 32% थी जो 2019 मे घटकर 8% के निचे पहुंच चुकी है, पर इतनी पुरानी पार्टी का इतने बडे पतन के पिछे क्या वोट ट्रांसफर ही एक वजह है या चुनाव आयोग के सहयोग से चुनाव पूर्व ईवीएम मे कोई गणीत तो नही लगाया गया है ?

https://twitter.com/ndtv/status/1138032068187774977?s=19

भाजपा चुनाव के पूर्व से जिस प्रकार से बंगाल मे करोडो-करोडो रुपयों को खर्च करते दिख रहे और अपने गोल को बढाने मे लगे उससे तो बात साफ है कि उनकी गिद्द नजर आने वाले विधानसभा पर ही, उनके द्वरा नेता और टीएमसी के कार्यकर्ताओ को रुपयो की लालच देकर अपने गोल को बढा रहे है जिसके फलस्वरुप पुरे प्रदेश मे भाजपा अशान्ती का मौहोल पैदा करने मे सफल दिख रहे है ।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बंगाल के पिछले पंचायत चुनाव मे भाजपा के उम्मीदवार अपने नामंकन भरने से डरते दिखे और इसी कारण से उन्हे अपने डर को झडवाने –फूकवाने के लिये उच्चतम न्यालाय का दरवाजा भी खट-खटाना पडा था, आज बंगाल मे भाजपा लडाई झगडे मे अगर सफल दिख रहे है तो उसके पिछे भाजपा का करोडो का Investment दिखने लगा है ।

बंगाल के Law and order को लेकर बंगाल के राज्यपाल का अचानक प्रधान मन्त्री और ग़ृह मन्त्री से मिलना अपने मे ही उनके मंसूबे के पोल को खोल रही है, मोदी सरकार भाजपा के गुण्डो के बल पर बंगाल मे आरजक्ता और अशान्ती फैलाकर राष्ट्रपती शासन लगाने के फेर मे है ।

अगर भाजपा अपने मंसुबे मे सफल होती है तो चुनाव आयोग से गुम हुए 20 लाख ईवीएम को आयोग के सहारे सेट करके अगला विधानसभा चुनाव जीतने मे सफल होगी ।