देश और दुनिया मे यह बात तो प्रचारित हो चुकी है कि भारत के प्रधान मन्त्री मोदी जी के शिक्षा के मामले मे बडा झोल है उनके स्नातक और परस्नातक डिग्री विवाद के घेरे मे है पर झूठ बोलने के मामेले मे तो वे आरएसएस विश्वविद्दालय से पीएचडी भी कर चुके है I
मै हमेशा ही मोदी जी के बेबाग झूठ बोलने की अदा पर कायल रहता हुं, देश मे इनके पहले बहुत से प्रधान मन्त्री आये और गये होगें पर उन लोगो ने इतने ताबड-तोड झूठ बोलने की ना तो हिम्मत दिखाया और ना ही इस विषय पर कोई रुची दिखाई I
झूठ बोलने का शिलसिला प्रधान मन्त्री के बनने के बाद से चालू हुआ है ऐसी बात नही है I झूठ बो ल ने का अभ्यास गुजरात के मुख्य मन्त्री काल मे मीडिया के मिली भगत से “गुजरात मॉडल” नामक एक बडे झूठ से चालु किया और मीडिया की देख रेख मे गुजरात मॉडल एक राष्ट्रीय मॉडल के रुप मे उभर कर आया और इसी कारण भा जपा और दे श की 31% जनता ने उन्हे प्रधान मन्त्री के कुर्सी तक पंहुचा दिया I
मोदी जी के झूठ बोलने की मानसिकता को समझने की जरुरत है, वे कभी भी बंद कमरे मे झूठ नही बोले है जब अपने झूठ को बढाने की बात आती है तो अवसर को ध्यान मे रखते हुए निजी या सरकारी मंच से अपने झूठ का प्रसार किया है I
मोदी जी अपने प्रोपागेण्डा के प्रति आतुर पाये गये, चाहे वो Negative propaganda क्यों न हो और देखा जाये तो वे Positive या Negative propaganda के जरिये वे मीडिया से लेकर सोशल मीडिया के चर्चे मे बने रहना चाहते है I
इस बार मोदी जी ने पुर्व की भांति स्वतंत्रता दिवस को अपने झूठ को फैलाने के लिये चुना और जिसका विरोध चारो तरफ शुरु हो चुका है, निचे दिये गये लिंक पर जा कर उनके झूठ का मजा लिया जा सकता है I
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