Sunday, 18 July 2021

Before 2024 Loksabha election, the BJP will be uprooted from Bengal

The national Chowkidar has not read Newton's third law and for this reason BJP leaders and workers in Bengal have started leaving party to join TMC

There was a time when the Central BJP adopted Chanakya policy to break Mamta Banerjee's party and made such a move that many TMC MLAs left the TMC in one stroke and joined BJP after being subdued by the temptation of PM Modi and Amit Shah.

At that time the two abbots of BJP felt that they have morally defeated Mamta Banerjee in the first phase and Amit Shah's 200+ slogan was given because of the same diplomacy.

Newton's third law says that for every action there is an equal and opposite reaction, perhaps PM Modi and Amit Shah may not have studied science and in Bengal the present situation is that the BJP leaders to workers from every district have started joining TMC again.  Bengal will become a BJP-free state by 2024.

Saturday, 17 July 2021

प्रधान सेवक ने झूठ बोलने में विश्व में इतिहास रचने का काम किया, बनारस की रैली में कोरोना को लेकर सदी का सबसे बड़ा झूठ बोला गया

देश के लोगों को प्रधानमंत्री पर गर्व होना चाहिए कि पूरे विश्व में पीएम मोदी एक इकलौता प्रधानमंत्री है जिन्होंने पीएम पद पर रहते हुए झूठ बोलने का विश्व रिकॉर्ड का इतिहास रचने का काम किया है।

https://www.facebook.com/YogiJhoothaHai/videos/538726290650657/

पीएम मोदी के झूठ बोलने और फर्जी वादों की गति तब देखने को मिलती है जब किसी राज्य का चुनाव नजदीक आता है। हाल में बनारस में कोरोना को लेकर योगी सरकार की जो तारीफ के पुल बांधने का काम किया है वो सदी की सबसे बड़ी झूठ का प्रचार किया गया है।

मोदी सरकार बंगाल के चुनाव और मत गणना के उपरांत हिंसा को लेकर अपने छाती पीटने का काम किया पर उत्तर प्रदेश में हिंसा के बल पंचायत के चुनाव में जीत हासिल किया इस मामले पीएम मोदी की खामोशी गजब की रही।

Friday, 2 July 2021

कोलकाता हाई कोर्ट के आदेशों से साफ हो चुका है कि मोदी सरकार की बंगाल में धारा 356 लागू करवाने की मंसा पर पानी फिर चुका है

[ कोलकाता हाई कोर्ट के आदेशों से साफ हो चुका है कि मोदी सरकार की बंगाल में धारा 356 लागू करवाने की मंसा पर पानी फिर चुका है ]

बंगाल में चुनाव के बाद तथाकथित हिंसा को लेकर उच्चतम न्यायालय और कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई भले हो रही है पर दोनो अदालते किसी दबाव में आकर चुनाव पूर्व बंगाल के बीजेपी नेताओं के अनेक उत्तेजना और उसकाने वाली भाषणों जिसमे सत्ता में आने के बाद टीएमसी के नेताओं को जान से मारने की धमकी वाली बातों को नजरंदाज किया है।

https://www.jagran.com/west-bengal/kolkata-order-of-calcutta-high-court-police-should-register-all-cases-of-violence-after-elections-in-bengal-victims-get-ration-21792023.html

कोलकाता हाई कोर्ट ने जिस प्रकार के आदेश पारित किए है वे सब मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है और इस प्रकार के आदेश अपेक्षित है पर जिस मंसा के साथ बीजेपी और मोदी सरकार ने इस प्रकार के याचिका दायर किया था उसका उद्देश्य था धारा 356 लगाकर एक चुनी हुई सरकार को गिराकर प्रदेश को केंद्र के अधीन लाना था।

गौर करने वाली बात यह है कि जिन हिंसा के घटनाओं को लेकर मामले दायर किए गये है वे सभी घटनाएं चुनाव आयोग के आचार संहिता लागू के दौरान हुआ था जिसकी जवाबदेही चुनाव आयोग की है।

Monday, 21 June 2021

संक्रमण के चलते जिन गरीब परिवार के कमाऊ व्यक्ति की मौत हुई है मोदी सरकार उन परिवार को आर्थिक सहायता नही देना चाहते है

केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वालों के परिजनों को 4 लाख का मुआवजा देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने ये इंकार सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में किया है। सरकार का कहना है कि करोना की वजह से सरकार आर्थिक दबाव में है। स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को बहुत पैसा खर्च करना पड़ रहा है, वहीं टैक्स वसूली भी बहुत कम हो गई है।

20 हजार करोड़ रुपये सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर खर्च के लिए सरकार पर पैसे हैं? कॉरपोरेटस के लाखों करोड़ माफ करने के लिए सरकार पर कोई आर्थिक दबाव नहीं पड़ता? सरकार ने पेट्रोल-डीजल से इतना पैसा कमा लिया है, जितना उसने अन्य टैक्सों से नहीं कमाया।

मतलब यह है कि पेट्रोल-डीजल ही सरकार के लिए कामधेनु गाय बने हुए हैं। वैसे कोरोनो के लिए 20 लाख करोड़ का पीएम केयर्स फंड किस काम आ रहा है? उस पर क्यों कुंडली मार कर बैठे हैं? क्यों उसे आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया है? क्यों उसका आडिट नहीं हो सकता? कुछ तो है जिसकी पर्देदारी है। परदा कभी तो उठेगा?

Friday, 18 June 2021

भाजपा बंगाल का चुनाव क्या हारे अब बंगाल को विभाजित करने पर आमादा है

बंगाल में भाजपा के ऐतिहासिक पराजय के बाद बीजेपी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चूका है अब एक खिसयानी बिल्ली कि तरह बंगाल कों दो हिस्सों में बांटने का मूड बना रहे है, उत्तर बंगाल में कुछ सीटों पर बढ़त कों ध्यान में रखकर बीजेपी उत्तर बंगाल कों बंगाल से तोडना चाहते है और नये राज्य के गठन करना चाहते है।

पर @BJP4India यूपी के विभाजन पर खामोश है, जब कि उप्र पश्चिम बंगाल से बड़ा राज्य है और इसके अलावा प्रशासनिक विफलता और प्रचलित #गुंडाराज चरम पर पहुंचा चुका है इन बातों को मद्दे नजर यूपी राज्य को अनिवार्य रूप से विभाजन की आवश्यकता है।

@MamataOfficial को बंगाल और बंगालियों को एकजुट करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने चाहिए और पुरजोर विरोध करना चाहिए।

#BengalStandUnited

Wednesday, 26 May 2021

Blame game against Allopathic doctors and medicines, by Lala Ramdev is a conspiracy to hide PM Modi's inability

Lala Ramdev have openly targeted allopathic doctors and allopathic medicines was not due to promote his own drug Coronil, but a deep political conspiracy has been hatched by the Modi government and Lala Ramdev together to save PM Modi's failure to combat Covid .

PM Modi is struggling with his failures due to the transition and the Modi government has become so gritty from home to abroad that it is impossible to compensate in a few years.

The reason behind the conspiracy of Lala Ramdev and Modi government was to somehow blame the Allopathic doctors and allopathic medicine to ease from Modi's failure but due to heavy protest by the members of Indian Medical Association the conspiracy could not work out.

Even though the Indian Medical Association has sent a long letter against Lala Ramdev to PM Modi, it is decided that PM Modi does not have the courage to take any action on Lala Ramdev.

Friday, 14 May 2021

बंगाल में करारी हार को बीजेपी पचा नहीं पा रहे तभी राज्यपाल को मोहरा बनाकर राष्ट्रपति शासन संक्रमण काल में लगाना चाहते है

यह अति दुर्भाग्य का विषय है कि संविधान  की शपथ लेने के बाद भी बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ संविधान विरोधी काम में लिप्त पाए गए। संविधान आधारित प्रोटोकॉल का उलंघन करना भी संविधान का विरोध ही है।

शीतलकूची या कुचबिहार में हिंसक घटना को बीते अनेक समय बीत जाने के बाद उनका उन हिंसक घटना वाले स्थानों पर जाने के पीछे राजनीति को समझना जरूरी है।

बंगाल के चुनाव में बीजेपी अपने भारी असफलता को अभी तक पचा नहीं पा रहे है तभी आइन श्रृंखला को मुद्दा बनाकर बीजेपी राष्ट्रपति शासन लगाने की फिराक में है ताकि पिछले दरवाजे से बंगाल पर कब्जा किया जा सके।

जब राजनीतिक हिंसा को लेकर एक मामला कोलकाता हाई कोर्ट में लंबित है तब राज्यपाल हाई कोर्ट को दरकिनार करते हुए नॉर्थ बंगाल जाना बीजेपी के गंदे राजनीति को उजागर करता है।