Wednesday, 26 May 2021

Blame game against Allopathic doctors and medicines, by Lala Ramdev is a conspiracy to hide PM Modi's inability

Lala Ramdev have openly targeted allopathic doctors and allopathic medicines was not due to promote his own drug Coronil, but a deep political conspiracy has been hatched by the Modi government and Lala Ramdev together to save PM Modi's failure to combat Covid .

PM Modi is struggling with his failures due to the transition and the Modi government has become so gritty from home to abroad that it is impossible to compensate in a few years.

The reason behind the conspiracy of Lala Ramdev and Modi government was to somehow blame the Allopathic doctors and allopathic medicine to ease from Modi's failure but due to heavy protest by the members of Indian Medical Association the conspiracy could not work out.

Even though the Indian Medical Association has sent a long letter against Lala Ramdev to PM Modi, it is decided that PM Modi does not have the courage to take any action on Lala Ramdev.

Friday, 14 May 2021

बंगाल में करारी हार को बीजेपी पचा नहीं पा रहे तभी राज्यपाल को मोहरा बनाकर राष्ट्रपति शासन संक्रमण काल में लगाना चाहते है

यह अति दुर्भाग्य का विषय है कि संविधान  की शपथ लेने के बाद भी बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ संविधान विरोधी काम में लिप्त पाए गए। संविधान आधारित प्रोटोकॉल का उलंघन करना भी संविधान का विरोध ही है।

शीतलकूची या कुचबिहार में हिंसक घटना को बीते अनेक समय बीत जाने के बाद उनका उन हिंसक घटना वाले स्थानों पर जाने के पीछे राजनीति को समझना जरूरी है।

बंगाल के चुनाव में बीजेपी अपने भारी असफलता को अभी तक पचा नहीं पा रहे है तभी आइन श्रृंखला को मुद्दा बनाकर बीजेपी राष्ट्रपति शासन लगाने की फिराक में है ताकि पिछले दरवाजे से बंगाल पर कब्जा किया जा सके।

जब राजनीतिक हिंसा को लेकर एक मामला कोलकाता हाई कोर्ट में लंबित है तब राज्यपाल हाई कोर्ट को दरकिनार करते हुए नॉर्थ बंगाल जाना बीजेपी के गंदे राजनीति को उजागर करता है।

Tuesday, 27 April 2021

विदेशी अखबारों ने कोरोना और मौत को लेकर मोदी सरकार को जमकर लताड़ लगाई

दुनिया के बड़े अख़बारों ने नरेन्द्र मोदी को बताया खलनायक, कहाः सरकार की ग़लती से कोरोना वायरस ने मचाया हाहाकार, चुनावी  फ़ायदे के लिए रैलियां करते रहे ।

भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को तार-तार कर दिया है।*फ़ॉरेन प्रेस ने उन्हें ऐसा नायक कहा जो अपनी ग़लत नीतियों की वजह से खलनायक में तब्दील हो चुका है।

दुनिया के बड़े अख़बारों का कहना है कि मोदी ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि कोरोना को वह हरा चुके हैं, पर वह ग़लत था।

फ़ॉरेन प्रेस के मुताबिक़, कोरोना की पहली लहर में सबसे कड़ी राष्ट्राव्यापी तालाबंदी या लॉकडाउन लगाकर मोदी ने वायरस को काफ़ी हद तक रोक दिया था। अलबत्ता दूसरी लहर ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। हालात ये हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं है तो मरीज़ों की लाश गुर्दाघरों में इधर उधर पड़ी है।

द गार्डियन ने अपनी मेन स्टोरी में जो फ़ोटो लगाया है उसमें शमशान में जल रही चिता की ऊंची लपटों को दिखाया गया है। इसकी हेडिंग का हिन्दी अनुवाद हैः सिस्टम ढह गयाः भारत कोविड के नरक में गिरता हुआ।*द टाइम्ज़ लंदन ने भी मोदी पर ज़ोरदार हमला किया है।

Sunday, 25 April 2021

प्रयागराज में संक्रमण को लेकर हो रहे कागजी बातें, जिला प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं

पीएम मोदी का देश के लिए देखे गए आत्मनिर्भर का सपना को संक्रमण ने अंजाम तक पहुंचा दिया है । प्रयागराज के एक स्वयं  सेवी संस्था आगाज फाउंडेशन ने प्रयागराज में गिरते हुए प्रबंधन को लेकर जिस प्रकार के परेशानियों को अपने फेसबुक में साझा किया वो बहुत ही निराशाजनक है।

संस्थां के मुखिया ने लिखा कि संस्था के पास लगातार हेल्पलाइन पर या अन्य कार्यकर्ताओं के पास ऑक्सिजन, बेड आदि की व्यवस्था हेतु लगातार कॉल आ रहा है जिसमे अब हमें हाथ जोड़ना पड़ रहा है क्योंकि बेड कहीं है ही नही।

अब सवाल फ़िर से शासन और प्रशासन से ही है। हॉस्पिटल में बेड नही है, दिए गए दुकानों में रेमिडीसीवेर नही है, ऑक्सिजन सिलेंडर नही है.. तो व्यवस्था किस दिशा से सुदृण होगा इसका जवाब किसी के पास नही है।

संस्था ने आगे कहा कि अगर बेड की दिक्कते लगातार हो रही है तो क्यों कोई मैरेज हॉल या किसी बड़े सेंटर पर व्यवस्था नही किया जा रहा? लगातार लोग बिना बेड बिना इलाज के मर रहे है क्या इस पर भी राजनीति ज़रूरी है। सारी कार्यवाही पेपर तक कब तक सीमित रहेगा।

Friday, 9 April 2021

Appointment of the Chief Election Commissioner under the Collegium system should be done with the recommendations of the PAC of Parliament

The big game about EVMs started when the Modi government was formed, when many fingers were raised on the EVMs, the BJP changed its maneuver and made a drama of deliberate defeat in the assembly elections of many states so that EVMs can be vindicated.  .

The reality is that the Election Commission being an autonomus body has taken away their independence by the present government and the Election Commission has started to run directly from the PMO.

As long as the appointment of the Chief Election Commissioner is made by the recommendations of the PMO, the game of EVMs will continue, because the appointment of the Election Commissioner, the PM appoints his favorite retired IAS.

The appointment of the Chief Election Commissioner should also be based on the collegium system which can be selected through the PAC of Parliament.

Wednesday, 7 April 2021

देश का मुख्य चुनाव आयुक्त मोदी सरकार का मानसिक गुलाम बन चुका है, आयोग के फैसले ले रहे है #मो_शा जी



भाजपा बंगाल में थक हार कर #CashForVote को अपना लिया है, बंगाल के चुनाव के लिए बीजेपी रुपया खर्च करके वोट खरीदने में लगे है।

मोदी के जनसभा में सम्मलित होने के लिए 1000 रुपए के कूपन बांटे जा रहे और इस कूपन के जरिए के वोट खरीदना चाहता है। क्या बीजेपी का 200+ का नारा #CashForVote के दम पर है।

https://www.telegraphindia.com/west-bengal/west-bengal-assembly-elections-2021-cash-coupon-blows-up-on-bjp/cid/1811782

इन सब के बावजूद भी चुनाव आयोग क्यों खामोश है पर  #मो_शा के दबाव में आकर ममता बनर्जी को नोटिस थमाया है पर रुपए बांटने की खबर अंग्रेजी दैनिक The Telegraph में छपने के बाद कोई नोटिस बीजेपी को नही दिया है। 

क्या चुनाव आयोग बंगाल में भाजपा को जिताने के लिए सुपाड़ी लिए है।

Saturday, 3 April 2021

हिंदू मुस्लिम सौहाद्र के कारण बंगाल के चुनाव में बीजेपी की धार्मिक ध्रुईकरण सफल नही होगी

[ हिंदू मुस्लिम सौहाद्र के कारण बंगाल के चुनाव में बीजेपी की धार्मिक ध्रुईकरण सफल नही होगी ]

बंगाल के चुनाव में जब भाजपा ममता बनर्जी के विकास मॉडल के खिलाफ कोई शब्द बोल नही पा रहे है और साथ में पीएम मोदी के सात साल के कार्यकाल की उपलब्धि को गिनाने में असफल हुए तब जाकर अपने औकात पर उतर आए है।

भाजपा की औकात केवल हिंदू वोटों को ध्रुईकरण के जरिए अपने पक्ष में लाने का है और उनकी सोच है कि मुस्लिम समुदाय के खिलाफ गाली गलौज करने पर हिंदू वोट उनके पास आ सकते है।

इस प्रकार की सोच बीजेपी के कट्टर मानसिकता को दर्शाता है, इसी प्रकार की कट्टरता तालिबानी मुस्लिमों में पाए जाते है , इसका मतलब तालिबानी मुस्लिम और बीजेपी में कोई वैचारिक फर्क नही है।

बंगाल में शुरू से हिंदू मुस्लिम के बीच सौहाद्र बना हुआ है, चाहे वो कांग्रेस का शासन काल हो या बाम दल या तृणमूल का शासन काल में दोनो समुदाय में भाईचारा बना हुआ है और इस भाईचारे को भेदना बीजेपी के बस की बात नही है।