Tuesday, 16 February 2021

भाजपा को अपने राजनीतिक नारा जय श्री राम को बंगाल के चुनाव के पूर्व बचाव करना पड़ रहा है, जय सिया राम कहने से डरते है भाजपा

बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने माँ दुर्गा के खिलाफ अप्रिय बातें कहीं जिस कारण मां दुर्गा पर आस्था रखने वाले और भारत में रह रहे बंगाली समुदाय को भावनात्मक रूप से आहत किया है।

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गौरतलब है कि पिछले वर्ष दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अवैध रूप से दुर्गा पूजा को पूरे राज्य में रोकने की कोशिश की थी।

दुर्गा पूजा के प्रति प्रदेश शासन के इस अनादर को लेकर इलाहाबाद के बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन की सचिव की हैसियत से मेरे द इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

फैसले की सुनवाई और अदालती आदेश के बाद, योगी सरकार को दुर्गा पूजो को यूपी में आयोजन की अनुमति मजबूरी में देनी  पड़ी थी।

भाजपा का हिंदू देवी देवता के पूजन को लेकर अपना एक अलग नजरिया है, जय श्री राम का नारा बीजेपी को राजनीतिक तौर पर लाभदायक तभी माँ दुर्गा की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है।

Monday, 15 February 2021

दिशा रवि को मोदी पुलिस ने गिरफ्तार करके देश और विदेश में ख्याति देने काम किया है

जब से किसान आंदोलन ने जोर पकड़ा है तब से पीएम मोदी से लेकर मंत्री और मंत्री से लेकर बीजेपी आईटी सेल की सोच नाम स्तर को छूने लगा है और इसी कारण भाजपा के द्वारा लिए गए हर कदम उल्टा पड़ता दिख रहा है।

https://m.youtube.com/watch?v=d4UNt3mqR3Q&feature=share

संघी संप्रदाय के पास उनके तरकश में जितने तीर थे किसान आंदोलन के खिलाफ चला चुके है पर आंदोलन को आखिर अंतर्राष्ट्रीय दर्जा मिल चुका है, हम दो और हमारे दो के लिए जितनी फजीहत मोदी सरकार को करना था वो हो चुका है।

किसान आंदोलन के चर्चा को कुंद करने के लिए मोदी सरकार एक 22 वर्षीय लड़की को भी फर्जी एफआईआर के जरिए जेल में बंद इसलिए बंद करना पड़ा क्यों की वो एक अंतर्राष्ट्रीय टूल के जरिए किसान आंदोलन के लिए विश्व में जनमत तैयार करने में लगी थे पर दिल्ली पुलिस ने इस काम को देश विरोधी समझ कर उसे जेल में भेजने का काम किया है।

कल तक जिस लड़की को देश और दुनिया नही जानते थे उन्हे जेल भेजकर मोदी सरकार ने महामंडित करने का काम किया है।

Sunday, 14 February 2021

भाजपा का बंगाल में बिहार से ज्यादा बुरा हाल होना निश्चित है, सभाओ में भीड़ नदारद है

बंगाल में भाजपा का हाल  बिहार से ज्यादा बुरा होता दिख रहा है, बिहार में तो नितीश कुमार और जिला प्रशासन के सहयोग से किसी तरह से सत्ता हतियाने में सफल हुए थे।

अगर निचे दिए गए वीडिवो को देखे और कहे गए बातों को समझें तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के जान सभाओं में भीड़ नहीं जुट रहे है और दूसरी तरफ बीजेपी के राज्य स्तर के नेताओं का जेपी नड्डा से भी ज्यादा बुरा हाल है।

https://www.facebook.com/watch/?v=777557496505564

भाजपा कि इस बुरे हाल कि वजह इस कारण है कि मुख्य मंत्री ममता बनर्जी ने अपने दस साल के कार्यकाल में बंगाल के लोगो के लिए उम्मीद से ज्यादा से काम करके दिखया है ।

भाजपा ने जनसभाओ में भीड़ ना जुटने का ठीकरा तृणमूल पार्टी पर फोडा है, उनका कहना है कि TMC के डर के कारण भीड़ नहीं हो रही है ।

Saturday, 13 February 2021

एमएसपी को कानूनी जमा इसलिए नहीं पहनाया जा रहा है क्यों कि नुकसान हम दो और हमारे दो को होना है

जब तक नरेंद्र मोदी सरकार कृषि बिल और एमएसपी के मामले को लेकर लम्बे समय तक आँख मुंदे बैठे रहेंगे तब तक देश मे किसान आंदोलन कि आग धीरे धीरे देश में  फैल जायगी।

एक बात तो साफ हो चुकी है कि संयुक्त किसान मोर्चा भले ही सभी किसानो को तीन कृषि क़ानून को लेकर ना समझा पाएं हो पर सभी किसानो को एमएसपी के लाभ के बारे में अच्छी तरह से समझा चुके है कि एमएसपी से क्या आर्थिक लाभ होने वाला है।

https://www.facebook.com/NSUIHARYANA01/videos/712853752738575/

कल अगर मोदी सरकार एमएसपी को कानूनी जमा पहना देते है तो कल ही किसान आंदोलन खत्म हो सकता है चाहे कृषि क़ानून रहे या ना रहे।

एमएसपी को कानूनी दर्जा देने पर सरकार को कुछ नुकसान नहीं होना है पर सूट बूट कि सरकार को तो अपने हम दो और हमारे दो कि चिंता ज्यादा है।

Sunday, 7 February 2021

अहंकारी मोदी सरकार चोरी छिपे पारित किए गए कृषि कानून पर पूछते कि कृषि कानून में काला क्या है, सदन में चर्चा से भागना क्यों पडा

कुछ दिन पूर्व देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में अपने बातों को रखते हुए कहा कि  इस कृषि कानून में काला क्या है, जिस अध्यादेश को लॉक डाउन के समय गुप चुप तरीके से पारित किया गया था और बिना सदन में बहस किए और बिना सदन के सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे इन कानूनों को काला नहीं तो क्या स्वच्छ कहा जाएगा।

https://www.facebook.com/102861874573266/videos/543502829852247/

एक पुरानी कहावत है दाल में कुछ काला और कुछ लोग यह भी कहते है कि पूरी दाल ही काली है, सरकार ने किसान संगठनों से 11 बार वार्ता की पर कृषि मंत्री अपने ही कृषि कानून के उजालेपन या कृषि हित को किसानों को समझाने में विफल रहे।

अगर पीएम मोदी यह समझते है उनके द्वारा बनाए गए तीनो कृषि कानून परफेक्ट है तब अनेक संशोधन की बात क्यों कहा और क्यों इन कानूनों को दो सालों के लिए स्थगित करने की बात कही, जब की यह प्रस्ताव भी संविधान के विरोध में है किसी कानून पर नोटिफिकेशन के बाद किसी कानून को स्थगित नहीं रखा जा सकता है।

देश के लोगो ने भाजपा को भरपूर वोट देकर एक सरकार को अहंकारी और तानाशाही बनाने में मदद किया है।

Friday, 5 February 2021

आरएसएस प्रधान मोहन भागवत किसान आंदोलन पर इतनी लंबी चुप्पी क्यों साधे हुए है

देश की जनता यह कहना शुरू कर दिया है कि पीएम मोदी अदानी और अंबानी की चाटुकारिता के कारण पूरे देश और विदेश में नंगे हो चुके है।

क्या यह दृश्य आरएसएस के पितामह मोहन भागवत को नही दिख रहा है या भाजपा उनके बातों को आजकल उतना भाव नहीं दे रहे है।

https://khabar.ndtv.com/news/india/repeal-fir-restore-internet-service-government-should-make-positive-environment-for-talks-farm-unions-2362927

इस बात पर शोध होनी चाहिए कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जो हर विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देने से पीछे नहीं हटते है तो किसान आंदोलन को लेकर देश के लोगो के सामने अपनी बातों को रखने में साहस क्यों दिखा रहे है।

क्या आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को मोदी सरकार के द्वारा दिए गए जेड+ सुरक्षा को खोने का डर सता रहा कि किसानों के पक्ष में बात करने पर उनकी सुरक्षा जा सकती है।

Thursday, 4 February 2021

मानवाधिकार का हनन किसी भी देश का आंतरिक मामला नही हो सकता है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किसान आंदोलन को सपोर्ट करना कोई दोष नही

पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल ने अपने सपने में भी नही सोचा होगा कि किसान आंदोलन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक विकराल रूप धारण कर सकता है।

अब तो अनेक विदेशी हस्तियां मोदी सरकार के मानवाधिकार हनन को लेकर अपने विचार ट्वीटर के जरिए रखना शुरू किया है और हो ना हो कल मानवाधिकार के हनन को लेकर दूसरे देश इस संदर्भ में विरोध शुरु कर दें।

जहां तक मानवाधिकार के हनन की बात है तो मोदी सरकार को याद होना चाहिए कि विश्व में एक संस्थान है जिसे International Human Rights Commission के नाम से जाना जाता है और इस संस्था का मूल उद्देश है कि किसी भी देश में मानवाधिकार के हनन होने पर उस देश के विरुद्ध सवाल जवाब शुरू हो जाता है।

जिस प्रकार भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में किसानों के लोकतांत्रिक अधिकार को कुचलने का षड्यंत्र पीएम मोदी और उनकी पुलिस द्वारा किया जा रहा है उसकी कड़ी आलोचना विश्व स्तर में अगर हो रही है तो भारत सरकार और बीजेपी के समर्थको को यह नही कहना चाहिए कि मानवाधिकार के हनन देश का आंतरिक मामला है।