Friday, 16 March 2018

मझेठिया जैसे ड्रग माफिया को मिला मोदी सरकार और पंजाब के कांग्रेस सरकार का साथ, नही की कोई एस.आई.टी से जांच


पंजाब के शहर से लेकर गांव तक विक्रम मझेठिया का नाम बच्चो से लेकर बुर्जग लोग के जुवान मे बैठा हुआ है, उनका यह प्रचार उनके समाज सेवा या किसी बडे पैमाने मे धर्माथ कार्यो के लिये नही है आपितू उनकी पहचान एक ड्रग माफिया के रुप मे बनी हुई है, जिसे मोदी सरकार से लेकर पंजाब के कांग्रेस की सरकार अच्छी तरह से जानते है और पिछले विधान सभा के चुनाव मे कांग्रेस ने पंजाब से ड्रग के कारोबार को खत्म करने की बात पर मझेठिया का नाम लिया था I

जब आम आदमी पार्टी के मुखिया श्री अरविन्द केजरिवाल ने पंजाब के चुनाव मे जम कर उछाला तो मझेठिया को जबरद्स्त मिर्ची लग गई और पूंजिपति होने के नाते उन्होने मानहानी का मुकदमा केजरिवाल पर ठोक डाला I

कहते है कि कहीं मारे वीर तो कहीं भागे वीर और कुछ ऐसा ही कार्य केजरिवाल ने किया, उन्होने राजनीति से प्रेरित होकर मझेठिया से माफी के पेशकश की, केजरिवाल इसी बहाने मोदी सरकार और पंजाब के कांग्रेस सरकार का ड्रग माफिया के साथ गठजोड का खुलासा यह कह कर किया कि पंजाब की अमरिंदर सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार दोनों ने अदालत में कोई जांच रिपोर्ट नही दी, और मजीठिया को क्लीन चिट मिल गया I

इस बात से यह खुलासा तो हुआ कि पंजाब मे मझेठिया के दस सालों से अधिक समय से चले आ रहे ड्रग कारोबार से हुए लाभ मे भाजपा और कांग्रेस की झोली भी चन्दे के रुप मे भरते रहे और शायद यही कारण रहा जो दोनो सरकार ने अदालत मे कोई जांच रिपोर्ट पेश नही की और दुसरी तरफ मझेठिया को क्लिन चिट भी मुहैया करवाया. पंजाब मे ड्रग के कारण जो भी परिवार उजडे उसके पिछे मझेठिया को बचाने वाले दोनो पार्टी उतने पाप के भागीदार है जितना मझेठिया है I

उच्चतम न्यालय के चार वरिष्ठ जजो द्वारा देश के लोकतन्त्र की खतरे वाली बात कह कर देश के लोगो को चार जजो ने यह संदेश देने की कोशिश की जो न्यालय मे चल रहा है वह ठिक नही है

उन चार जजों की बातें तब पुक्ता साबित हुई जब उच्चतम न्यालय ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी के पॉवर शेयरिग वाले मुकदमे की सुनवाई खत्म होने के बावजूद भी माननिय कोर्ट ने अपने फैसले को अनिश्चित काल के लिये सुरक्षित करके रखा है, जब कि आम प्रचलन यह भी है कि Justice delayed is justice denied I

Judiciary के इस बिगडे माहौल एंव जांच एजेंसियां केंद्र सरकार की कठपुतली होने वाली बात को ध्यान मे रखकर अरविन्द केजरिवाल ने माफी मांगने की जो पेशकश की वो काम केवल एक बुद्दीमान व्यक्ती ही कर सकता है, केजरिवाल मे एक खास बात है कि वे जल्दी भावनाओ मे नही तैरना चाहते है बल्कि भगवान कृष्ण से प्रेरित होकर रण छोड होना पसंद करते है I

मानहानि के मुकदमे अब फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेंगे
साबित न होने पर 2 साल की सज़ा का प्रावधान है
केंद्र सरकार पहले से ही अरविंद के पीछे

Tuesday, 13 March 2018

Political Analysis of India: मुख्य चुनाव आयोग ने आप एमएमएल की सदस्यता रद्द वाले...

Political Analysis of India: मुख्य चुनाव आयोग ने आप एमएमएल की सदस्यता रद्द वाले...: दिल्ली उच्च न्यालय मे आम आदमी पार्टी के एम.एल.ए की सदस्यता खत्म करने वाले मामले पर मुख्य चुनाव आयोग द्वरा राष्ट्रपति को भेजे गये Recomm...

मुख्य चुनाव आयोग ने आप एमएमएल की सदस्यता रद्द वाले मामले मे दिल्ली उच्च न्यालय द्वारा उठाये गये नेचूरल जस्टिस की बात को दर किनार किया


दिल्ली उच्च न्यालय मे आम आदमी पार्टी के एम.एल.ए की सदस्यता खत्म करने वाले मामले पर मुख्य चुनाव आयोग द्वरा राष्ट्रपति को भेजे गये Recommendation के खिलाफ आप एमएलए ने एक याचिका दायर की थी, जिसकी पहली सुनवाई हो चुकी है I

उल्लेखनिय है कि इस याचिका की पहली सुनवाई के दौरान दिल्ली के उच्च न्यालय ने न केवल मुख्य चुनाव आयोग को 21 एमएलए की सदस्यता रद्द होने के बाद नये चुनाव के Notification जारि करने पर प्रतिबन्ध लागाया आपितू माननीय कोर्ट ने यह भी कह डाला कि जो भी फैसला आयोग ने लिया है वह Natural justice के विरुद्द है और इसी बात को लेकर कोर्ट ने इस संदर्भ मे चुनाव आयोग को फिर से विवेचना करने का मौका दिया I

हाल मे चुनाव आयोग ने उच्च न्यालय की भावनाओं को दरकिनार करते हुए एक लिखित बयान दाखिल किया, जिसमे आयोग ने अपनी दबंगई दिखाते हुए यह लिख डाला कि आयोग बाध्य नही है कि आप एमएलए की बातो को सुने, इससे यह पता चल रहा है कि आयोग देश के कानून के उपर बैठा हुआ है I

http://www.jantakareporter.com/india/not-bound-call-aap-mlas-oral-hearing-ec-high-court/171645/

देश का कानून बडे से बडे कातिल या घोर आतंकवादी को सजा सुनाने से पहले मौका देती है कि वो अपने बचाव मे अपनी बात को रखे पर आयोग ने अपनी दबंगई को बनाये रखने के लिये कोर्ट के सामने झूठी बातो का सहारा लेते हुए यह कह दिया कि आप एमएलए को कई बार अपनी बातो के रखने के लिये मौका दिया जा चुका है, जब की आप के एमएलए ने इनकी झूठी बातो को शुरु मे ही नकार दिया है I

बात साफ है कि मुख्य चुनाव आयोग की दबंगई के पिछे भाजपा और मोदी सरकार का खुला हाथ है, नही तो आयोग की इतनी हिम्मत न होती की वे दिल्ली उच्च न्यालय के भावनाओं से खेल सके, जिसमे उच्च न्यालय ने Natural justice की बात रखे थे, दुसरी तरफ आयोग जानबूझ कर अपने जावाब मे Natural justice के विषय पर कोई गम्भीर प्रतिक्रिया नही दी I यह बात सभी समझने लगे है कि मुख्य चानाव आयोग भी पिंजरे का तोता बन चुकी है और इसी कारण चुनाव के परिणाम प्रभावित होने लगी है I

Saturday, 3 March 2018

Political Analysis of India: त्रिपुरा विधान सभा के चुनाव परिणाम का पोस्टमार्टम

Political Analysis of India: त्रिपुरा विधान सभा के चुनाव परिणाम का पोस्टमार्टम: कटु सत्य यह भी है कि 2013 मे त्रिपुरा के पिछले विधान सभा के चुनाव मे भाजपा ने त्रिपुरा के 60 विधान सभा सिटो के लिये 50 प्रत्यासी को मैदा...

त्रिपुरा विधान सभा के चुनाव परिणाम का पोस्टमार्टम

कटु सत्य यह भी है कि 2013 मे त्रिपुरा के पिछले विधान सभा के चुनाव मे भाजपा ने त्रिपुरा के 60 विधान सभा सिटो के लिये 50 प्रत्यासी को मैदान पर उतारे थे, यह वो समय था जब कामधेनु गाय (ईवीएम) के रख रखाव की जिम्मेदारी कांग्रेस पर थी, 2013 के विधान सभा के चुनाव के नतिजे को आज ध्यान दिया जाये तो भाजपा 49 सिटो पर अपने जमानत तक नही बचा सकी थी I

हैरानी की बात यह भी थी कि त्रिपुरा के पिछले विधान सभा चुनाव मे भाजपा को मात्र 1.5 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए थे, जब की इस वर्ष (2018) भाजपा को 45% वोट मिले है, मजे की बात यह भी कि भाजपा ने इस बार आसाम के तर्ज पर त्रिपुरा के लिये किसी जमीनी नेता का नाम मुख्य मन्त्री के लिये नही उछाला था जैसा कि वे कर्नाटक मे आगामी विधान सभा चुनाव के लिये श्री यदुरप्पा का नाम मुख्य मन्त्री पद के लिये घोषित किया है I

देश के लोगो को पुरी तरह से यकीन है कि पीएम मोदी ने पिछले 4 साल के कार्यकाल मे त्रिपुरा के लिये कोई विशेष पैकेज की घोषणा भी नही किये थे और जहां तक मोदी मैजिक का सवाल है वो तो नोट बन्दी, जीएसटी और छोटे मोदी जैसे अनेक लोगो का देश के धन को लेकर विदेश पलायन के दंश झेल रहे है, पिछले चार साल मे जितने भी योजनायें मोदी जी ने डंका बजाकर शुरु किया था, वे सभी योजनाओ आज बिरगती को प्राप्त कर चुके है I

अब समझने की बात यह है कि भाजपा पिछले चुनाव मे प्राप्त 1.5 प्रतिशत वोटों को किस आधार पर 45 प्रतिशत बढाया, जब कि मोदी जी की अपनी दुर्दशा आज चरम पर पंहुच चुकी है I

इन दोनो प्रतिशतो के फर्क समझने और समझाने के लिये कोई ठोस वजह तो सामने दिख नही रही है, पर हां जहां तक कामधेनु गाय (ईवीएम) की दुहाई की बात है, भाजपा गाय दुहाई मे पारंगत हो चुके है और कांग्रेस अपने समय पर दुहने मे असफल रहे भले ही कांग्रेस और दोहन भाजपा का कर्नाटक मे भी देखने को मिलेगा I